दूध बिक नहीं रहा, मवेशियों का चारा भी हुआ खत्म, रोजगार भी नही है, जनता क्या करे?

Milk in Hotel
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इस समय पशु पालक किसानों की स्थिति दिन ब दिन बदतर होती जा रही है. पशुओ के सामने चारा की संकट भी बढ़ गई है . क्योंकि मुसलाधार बारिश और बाढ़ से अधिकांश पालको का रखा सूखा चारा सड गया है . इसके कारण दूध के उत्पादन भी घटा है .

इस विषम परिस्थितियों में उसे 30 से 35 रुपये प्रति लीटर दूध बेचना पड़ रहा है . एक ओर पशुओं के खिलाने के लिए चारा की संकट है. वही दूसरी तरफ होटलों, मिठाई की दुकानों में उतनी मांग नही है. शादी विवाह बंद होने से विक्री पर भी ब्रेक लगा है . इस स्थिति में किसी तरह दूध को औने पौने दामों पर विक्री करनी पड़ रही है . यह कहना था मझरिया के पशुपालक सह दूध व्यवसायी वासुदेव मलिक का .

जबकि सलीम मियाँ का कहना है कि इ कोरोना वायरस मे सुखा पशु चारा के संकट बढ़ गईल बा .चारा के अभाव में हमनी केहुगे व्यवस्था करत बानी .वहीं दिनेश व कृष्णा का कहना है कि दूध के खपत नईखे होत. मवेशियों के चारा के दाम भी बढ गईल बा. आय आधा हो गईल.अब त परिवार कइसे चली उहे चिंता बा . जेसे औने पौने दाम पर दूध बेचे के पड़त बा . जबकि पशुपालक रामेश्वर यादव का कहना है कि दूध ले जाने वाले लोग भी नही आ रहे है . गांव से चौक चौराहों व शहरो का होटल व मिठाई की दुकाने भी नही चल पा रही है . बंदी की तरह ही स्थिति है.