4 महीने के लॉकडाउन से सरकार ने बचाईं कितनी जानें? स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बताया


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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने सोमवार को मॉनसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में बताया कि लॉकडाउन लागू करने की वजह से 37 हजार से लेकर 78 हजार लोगों की जानें बचाई जा सकीं. इसके अलावा, चार महीने तक चली देशव्यापी बंदी ने 14-29 लाख कोरोना मामलों को भी रोका.

डॉ. हर्षवर्धन ने संसद में कहा, ‘इन चार महीनों का इस्तेमाल अतिरिक्त स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के निर्माण, मानव संसाधन को बढ़ाने, पीपीई किट्स, एन -95 मास्क और वेंटिलेटर जैसे महत्वपूर्ण चीजों को बनाने के लिए किया गया. मार्च 2020 के मुकाबले, आइसोलेशन बेड्स में 36.3 गुना और आईसीयू बेड्स में 24.6 गुना वृद्धि हुई है. जबकि तब देश में कोई भी पीपीई किट्स नहीं बनाई जाती थीं, लेकिन अब न सिर्फ बना रहे हैं, बल्कि अन्य देशों को निर्यात भी कर रहे हैं.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि भारत ने लॉकडाउन की वजह से प्रति दस लाख जनसंख्या में 3,328 मामले और 55 मौतें तक सीमित करने में सक्षम रहा है. यह दुनिया के अन्य देशों की तुलना में काफी कम है. सबसे ज्यादा मामले और मौतें जिन राज्यों में हुई हैं, उनमें महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, बिहार, तेलंगाना, ओडिशा, असम, केरल और गुजरात हैं. ये सभी राज्यों में कम से कम एक लाख मामले सामने आ चुके हैं.

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री हर्षवर्धन की अध्यक्षता में 3 फरवरी को मंत्रियों के एक समूह के निर्माण समेत बीमारी को फैलाने से रोकने के लिए सरकार ने कई सक्रिय कदम उठाए हैं. मंत्रियों के समूह में विदेश मंत्री, नागरिक उड्डयन मंत्री, गृह राज्य मंत्री समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं. इसे बनाए जाने के बाद अब तक 20 बार मुलाकात हो चुकी है.

उन्होंने बताया कि 12 सितंबर 2020 तक, कुल 15,284 कोविड-19 ट्रीटमेंट सेंटर बनाए जा चुके हैं, जिसमें 13,14,646 बिना ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड्स हैं. इसके अलावा, 2,31,093 ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड्स और 62,717 आईसीयू बेड्स बनाए गए हैं.

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