छह साल बाद भूकंप से हिली बिहार की धरती, 3.5 की तीव्रता के साथ पटना बना केंद्र

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बिहार में छह साल बाद सोमवार की रात भूकंप के झटके महसूस किए गए. रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 3.5 बताई जा रही है. हालांकि दशकों बाद भूकंप का केंद्र पटना में होने से इसकी तीव्रता ज्यादा महसूस की गई. पटना सहित बिहार के कई जिलों में रात 9 बजकर 23 मिनट पर छह से सात सेकेंड तक झटका महसूस किया गया. पटना जिले में जमीन से पांच किलोमीटर नीचे इसका केंद्र रहा.

भूकंप की वजह से घरों के पंखे डोलने लगे और लोग दहशत से घरों और अपार्टमेंटों के बाहर आ गए. सड़कों पर वाहन चला रहे लोगों को भी भूकंप का एहसास हुआ और बेली रोड पर जगह-जगह वाहन खड़ा कर लोग अपनों का हाल-चाल लेते देखे गए.

मौसम विज्ञान केंद्र पटना के अनुसार नालंदा से 20 किमी उत्तर और पश्चिम की ओर पटना जिले में इसका केंद्र रहा है. इससे पहले निकोबार द्वीप में भी सोमवार की रात 7 बजकर 24 मिनट पर रिक्टर पैमाने पर 4.2 तीव्रता का भूकंप आया था. तब इसका केंद्र निकोबार में होने की वजह से बिहार में असर नहीं देखा गया था लेकिन रात 9 बजकर 23 मिनट के झटके से लोगों में दहशत देखा गया. आफ्टर शॉक के डर से लोग काफी देर तक घरों के बाहर रहे. बेली रोड पर बसे मोहल्लों के लोग भी घरों से बाहर टहलते दिखे. हालांकि बाजारों में खरीदारी पर इसका कोई असर नहीं पड़ा.

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पटना केंद्र होना बड़ी चिंता

छह वर्ष बाद बिहार में आए भूकंप का केंद्र भी राज्य में ही होना चिंता का बड़ा कारण है. भूकम्प के झटकों ने सबको हिलाकर रख दिया है. पटना सिस्मिक जोन-4 में आता है. यह भूकंप के दृष्टिकोण से संवेदनशील इलाका है. हालांकि आपदा विभाग के अनुसार इस तरह के भूकंप को सैलो एनर्जी वाला भूकंप कहते हैं जो ज्यादा नुकसानदेह नहीं होता है. भूगोलवेत्ता अभय सिंह ने बताया कि ऐसा कई दशकों के बाद हुआ है, जब बिहार में ही भूकंप का केंद्र रहा हो.

1934 में बिहार में हुई थी बड़ी त्रासदी

बिहार में भूकंप से सबसे बड़ी त्रासदी 15 जनवरी 1934 को हुई थी जब इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 8.4 थी. तब इस भूकंप के झटके में 10,700 लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद की दूसरी सबसे बड़ी तबाही 21 अगस्त 1988 में आए भूकंप से हुई थी, जिसका केंद्र बिहार-नेपाल की सीमा था और भूकंप की तीव्रता थी 6.7. इसमें 1000 लोगों की मौत हुई थी जबकि भूकंप की हालिया घटनाओं को देखें तो 25 अप्रैल 2015 को 7.9 तीव्रता वाला भूकंप आया था, जिसमें करीब 58 लोगों की मौत हुई थी और भूकंप का केंद्र था भारत-नेपाल सीमा.

पटना सहित लगभग पूरे सूबे में भूकंप के झटके महसूस किए गए. इसका केंद्र पटना के आसपास था. तीव्रता अधिक नहीं थी लेकिन कंपन देर तक महसूस की गई.

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