कांग्रेस का विपक्ष पर तीखा निशाना, कहा पीएम मोदी को सिर्फ चुनाव में याद आता है बिहार

BIHAR DESK : कांग्रेस के विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री की 294 करोड़ की घोषणा चुनावी लालीपॉप हैं. कहा कि कहीं इसका भी हश्र 2015 में की गई सवा लाख करोड़ की घोषणा जैसा न हो. सदानंद सिंह ने कहा कि जनता इस बार किसी के झांसे में आने
 
कांग्रेस का विपक्ष पर तीखा निशाना, कहा पीएम मोदी को सिर्फ चुनाव में याद आता है बिहार

BIHAR DESK : कांग्रेस के विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री की 294 करोड़ की घोषणा चुनावी लालीपॉप हैं. कहा कि कहीं इसका भी हश्र 2015 में की गई सवा लाख करोड़ की घोषणा जैसा न हो. सदानंद सिंह ने कहा कि जनता इस बार किसी के झांसे में आने वाली नहीं है. उन्होंने कहा कि 15 लाख देने की बात भी जुमलेबाजी निकली. कहा कि सवाल यह उठता है कि प्रधानमंत्री को सिर्फ चुनावी सीजन में ही बिहार की याद क्यों आती है.

बता दें कि गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में 294 करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास किया. पीएम मोदी ने कहा कि बिहार के हर जिले के उत्पाद की खास पहचान है. जर्दालु आम, लीची, मखाना, मधुबनी पेटिंग आदि कई चर्चित उत्पाद हैं. लोकल को जितना वोकल करेगा उतना ज्यादा बिहार आत्मनिर्भर बनेगा. पीएम ने गुरुवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री मत्सय संपदा योजना की शुरुआत की और बिहार में 294 करोड़ की मत्स्य एवं कृषि से संबंधित योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी की. संबोधन की शुरुआत भोजपुरी भाषा से की.

उन्होंने कहा कि बिहार गुलामी के समय से ही कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में देश को दिशा देता रहा है. हमलोग अक्सर पूसा की बात सुनते हैं. असली पूला बिहार के समस्तीपुर में ही है. दिल्ली का पूसा तो उसका जुड़वा भाई है.

पीएम ने कहा कि ब्लू रिवोलूशन (मछली पालन), व्हाइट रिवोलूशन (डेयरी) और स्वीट रिवोलूशन (मधु) से गांवों को सुदृढ़ करना है. मत्स्य संपदा योजना में 20 हजार करोड़ से अधिक अगले चार सालों में खर्च किए जाएंगे. 1700 करोड़ से इसकी शुरुआत की जा रही है. देश के हर हिस्से में समुद्र और नदी किनारे बसे क्षेत्रों में मछली के व्यवसाय को ध्यान में रखते हुए पहली बार इतनी बड़ी योजना बनी है. आजादी के बाद इस पर जितना निवेश हुआ, उससे कई गुना अधिक निवेश मत्स्य संपदा योजना में किए जा रहे हैं. इससे देश के 55 लाख को रोजगार मिलेगा और 70 लाख टन अतिरिक्त मछली का उत्पादन हो सकेगा.

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