क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल इस्लाम के लिए हराम, इस इस्लामिक संस्था ने जारी किया फतवा

  
CryptoCurrency BTC
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हिंदी न्यूज़ डेस्क: एक और जहां आज के समय में क्रिप्टो करेंसी डिजिटल लेन-देन में एक अहम रोल अदा कर रही है. और दुनिया के बड़े से बड़े देशों ने इस क्रिप्टो करेंसी को स्वीकारा भी है. साथ ही बहुत लोगों को इस क्रिप्टो करेंसी ने अमीर भी किया है. लेकिन इस क्रिप्टो करेंसी को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. इंडोनेशिया की इस्लामिक संस्था ने क्रिप्टो करेंसी को लेकर फतवा जारी किया है.

 इंडोनेशिया की उलेमा काउंसिल की तरफ से कहा गया है कि क्रिप्टो करेंसी का इस्तेमाल करना इस्लाम में हराम है (CryptoCurrency is Haram in Islam). हालांकि इस्लामिक संस्था की तरफ से यह भी कहा गया है कि इसके तहत डिजिटल संपत्ति की ट्रेडिंग की अनुमति दी जा सकती है. इंडोनेशिया में दुनिया के सबसे ज्यादा मुस्लिम रहते हैं. गुरुवार को संस्था की तरफ से कहा गया कि क्रिप्टो को करेंसी की तरह इस्तेमाल करने पर पाबंदी लगाई जाती है. लेकिन इसमें निवेश और डिजिटल टोकन की ट्रेडिंग कमोटिडी में की जा सकती है.

संबंधित मंत्रालय की तरफ से इससे पहले बताया गया था कि कमोडिटी के क्षेत्र में क्रिप्टो करेंसी ट्रेडिंग की वैल्यू अभी 370 ट्रिलियन है. साल 2020 के अंत तक कुल ट्रेडिंग 65 ट्रिलियन रुपए तक थी. ट्रेडर्स की संख्या भी 4 मिलियन से बढ़कर 6.5 मिलियन तक पहुंच गई है. इस्लामिक संस्था के धार्मिक हुक्मनामा प्रमुख एसरोरुन नियाम सोलेह ने कहा कि  शरीया कानून के मुताबिक भुगतान के लिए क्रिप्टो करेंसी हराम है.

क्योंकि यह अस्थिर और नुकसानदेह है. इसके इस्तेमाल से कानून का उल्लंघन होता है. कमोडिटी के तौर पर क्रिप्टो करेंसी की ट्रेडिंग भी कानून के खिलाफ है. इस्लामिक संस्था ने इसे जुआ बताया है क्योंकि यह इस्लाम के नियमों से ताल्लुक नहीं रखता. हालांकि, संस्था ने क्रिप्टो करेंसी की ट्रेडिंग की अनुमति फिलहाल दी है जिसमें संपत्ति का पता हो और मुनाफे के बारे में जानकारी दी गई हो.

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